मौसम वैज्ञानिक की भूमिका निभाते हैं। ये जीव

हमारे आस-पास कुछ जानवर ऐसे भी होते हैं। जो किसी मौसम के विज्ञानों की तरह मौसम में आ रहे बदलाव को अपनी सिक्स्थ सेंस से जान जाते हैं। वे अपने व्यवहार से मॉनसून की पूर्व सूचना भी देते हैं। ऐसे जीव-जंतुओं को अगर हम मौसम वैज्ञानिक कहें, तो गलत नही होगा। वैज्ञानिकों ने भी साबित किया है कि हम इनसान भी कई बार बदलते मौसम का अंदाजा नही लगा पाते, लेकिन प्रकृति के ज्यादा नजदीक होने के कारण ये जीव आसानी से अंदाजा लगा लेते हैं। इनमें से कई तो नमी भरे मॉनसून का अंदेशा पाकर जमीन से बाहर आने लगते हैं।

मौसम वैज्ञानिक की भूमिका निभाते हैं। ये जीव

मॉनसून का मौसम चल रहा है। उमस भरी गरमी के बीच बारिश की फुहार का अपना आनंद होता है। आसमान में छाए बदलो को देखकर आप खुशी से भर जाते होंगे। कई बार आप तो बारिश की रिमझिम ठंडी फुलरों में भीगने और खूब मस्ती करने की प्लानिंग भी कर लेते होंगे। लेकिन आप गौर करे तो बारिश का इंतजार केवल आप को ही नहीं होता, आपके आसपास पाये जानेवाले जीव-जंतुओ को भी होता है। उनमे से कई मॉनसून का मजा भी लेते हैं

मोर

आपने देखा होगा कि आसमान में छाये बादल को देख कर मोर पंख फैला-फैला कर नाचने लगते है। एक ओर तो वे खुग होते हैं। दूसरी ओर बारिश की अंदेशा होने पर अपना भोजन समय पर जुटाने के लिए अपने साथियो को ऊँचे स्वर में संदेश देते हैं।

चींटिया

जमीन के नीचे हाइबरनेट होकर अपनी कॉलोनी में रह रही चीटिया मॉनसून के आने का अंदेशा देती है। जमीन के नीचे नमी बढ़ने से परेशान चीटिया अपने बिल से बाहर आने लगते हैं। कुछ चीटियो के छोटे-छोटे पंख उग आते है। और वे लाखों की तादाद मैं लाइने बना कर जमीन से बाहर आने लगती है। हालांकि, उनके भी पंख एक हफ्ते में गिर जाते हैं।

बीटल

जमीन के नीचे रहनेवाले छोटा से बीटल को बारिश में बह जाने का खतरा रहता है। इसलिए अंदेशा होने पर वे अपना भोजन इकट्ठा करते दिखते है। वह अपने वजन से कहीं ज्यादा खाना एक साथ रोल करते हुए अपने बिल तक ले जाते हैं। बारिश में पड़े के बार्क में या बड़े पत्थर के चीचे छिप कर बारिश के पानी में वह जाने से बचते हैं।

मकड़िया

अपने घर में जालों पर झूलती मकड़ियां जरूर देखी होगी। जो लाख सफाई के बावजूद कुछ ही दिन में फिर से जाले के साथ दिख जाती है। लेकिन ये मानसून की मौसम आने तक गायब हो जाती है। असल में वातावरण में नमी होने के कारण इनका जाला खराब हो जाता है। और वे जाला छोर देती है। और दीवार की दरारे में रहने लगती है।

पालतू जानवर

बिल्लियां, कुत्ते, खरगोश जैसे पालतू जानवर अपने पंजों से आँखों और चेहरे की सफाई करते हैं। वे कान रगड़ कर साफ करते हैं। और पंजो को चाटते हैं। दरअसल मौसम में आये बदलाब के कारण हमारे वायुमंडल पर दबाव पड़ता है। जिसका असर इन पशुओं पर भी पड़ता है। कानो में हवा की काम आवाजे जाएं, इसके लिए वे ऐसा करते हैं।

मधुमक्खियां और तितलियां

आपने वसंत या गरमी के मौसम में रंग-बिरंगे फूलो पर मंडराती और पराग कण चूसती रंग-बिरंगी तितलियां या मधुमक्खियां जरूर देखी होंगी। वातावरण में नमी होने पर इन्हें बारिश का अंदेशा हो जाता है। और ये अचानक से गायब हो जाती है। दरअसल, छोटे-छोटे ये जीव बारिश मे उर नही पाते। बारिश की एक बूंद भी उनके पंख खराब कर सकती है। इसलिए बारिश में भींगने से बचने के लिए वे बड़े पौधो या पेड़ो की बड़ी-बड़ी पत्रियों के नीचे पकड़ बनाकर रहते हैं।

मक्खियां

गरमिया खत्म होते होते घर = बाहर उड़ती और खाने-पीने की चीजों पर बैठती और कभी आप पर आकर बैठती मक्खियों से आप काफी परेशान हो जाते होंगे। करी गरमी के बाद नमी और उमस भरे-मॉनसून के मौसम में मक्खियाँ ठंडक महसूस करती है। और मौका देख कर घर में घुस आती है।

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आज आपने क्या सीखा

आज आपने यह सीखा की ऐसा कोन सा जीव है जो मौसम वैज्ञानिक की भूमिका निभाते हैं। ये सभी विज्ञानों की तरह मौसम में आ रहे बनलाव को अपनी सिक्स्थ सेंस से जान जाते हैं। और सभी सुरक्षित यानी वर्षा से बचने के लिए अपना अपना स्थान खोज लेते हैं। उम्मीद है कि मेरे द्वारा दिए गए जनरल जानकारी आपको अच्छा लगा होगा। अगर अच्छा लगा है तो प्लीज कमेंट कर के जरूर बताएं कैसा लगा। और जितना हो सके इसे शेयर करना न भूले। धन्यवाद

Manish Kumar
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