डीआरएस (DRS) क्या होता है? यहां से ले जानकारी सरल शब्दों में

डीआरएस (DRS) क्या होता है? क्रिकेट मैं अंपायर का निर्णय सर्वमान्य होता है। ऐसे में कई बार अंपायर से चूक भी हो जाता है। और कभी बॉलर तो कभी बैट्समैन के पक्ष में गलत फैसले लिए चले जाते हैं। उसे देखते हुऐ खिलाड़ियों को अंपायर के फैसले को रिव्यू करने की सुविधा दी गई है। जिसे डीआरएस (DRS) के नाम से जाना करता है। डीआरएस आजकल काफ़ी चर्चे में भी है।

दरअसल अंपायर डिसीजन रिव्यू सिस्टम, जिसे पहले यूडीआरएस (UDRS) अब डीआरएस (DRS) कहा जाता है। सबसे पहले 2008 में पेश किया गया था।

डीआरएस (DRS) क्या होता है? यहां से ले जानकारी सरल शब्दों में

यह भारत और श्रीलंका के बीच अपनाया गया था। इसके सफलता पूर्वक परीक्षण के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसलिंग (ICC) में 24 नवंबर 2009 को इसकी अधिकारिता शुरुआत कर दी। इसकी शुरुआत न्यूजीलैंड और पाकिस्तान टेस्ट मैच में की गई। टेस्ट मैच में टीमों को हर 80 ओवर के दौरान दो रिव्यू मिलते हैं। अगर ऑन फील्ड अंपायर का फैसला गलत साबित होता है। तो रिव्यू कायम रहता है। वही वनडे में हर टीम को दो ही रिव्यू मिलते हैं।

क्या है इसकी प्रक्रिया

डीआरएस में मुख्य रूप से तीन तकनीकों का कमाल होता है। इनके आधार पर ही थर्ड अंपायर यह तय करते हैं कि बल्लेबाज आउट है या नही वे रिप्ले में बार-बार देखते हैं। की आखिर ऑन फील्ड अंपायर का फैसला सही है या नहीं

हॉक आई

यह एक सभाषी बॉल ट्रैकिंग तकनीक है।, जिसका इस्तेमाल एलबीडब्ल्यू के फैसलों में किया जाता है। उस तकनीक के जरिए यह तय किया जाता है। कि क्या गेंद पैड से टकराने के बाद विकेटों में टकराई या नहीं। इसमें गेंद की लाइन और लेंथ को मापा जा सकता है।

हॉट स्पॉट

यह एक इंफ्रारेड सिस्टम है। या तकनीक एलबीडब्ल्यू और कैच के करीबी मामलों में संस्य को समाप्त करता है। इस तकनीक में बल्लेबाज की पूरी तस्वीर काली हो जाती है। और जहां गेंद टकराती है वह हिस्सा सफेद हो जाता है।

रिंकोमीटर

यह डीआरएस का एक अहम हिस्सा है। इसमें माइक्रोफोन के जरिए यह तय किया जाता है कि आखिर गेंद बल्ले के किनारे में टकराई या नहीं। इसका यही काम होता है।

क्यों आया डीआरएस

डीआरएस को क्रिकेट में मानवीय त्रुटियों को कम करने के लिए लाया गया। इसके जरिए टीम के कप्तान ऑन फील्ड अंपायर के फैसले से असमत होने पर अपील कर सकते हैं। इसके लिए टीमों को अपने हाथों से अंग्रेजी अक्षर टी का निशान बनाना पड़ता है। उसके बाद तीसरा अंपायर सभी तकनीकों का इस्तेमाल कर आखरी फैसला करता है।

डीआरएस (DRS) क्या होता है? यहां से ले जानकारी सरल शब्दों में

आज आपको क्या सीखने को मिला

आज हमने डीआरएस क्या होता है। उसके बारे में पूरी जानकारी को समझा। मैं उम्मीद करता हूं कि आपको यह जानकारी अच्छा लगा होगा। क्योंकि बहुत सारे लोग तो मैच देखते हैं। पर जब बात डीआरएस की आती है तो सब सोचने लगते हैं की डीआरएस (DRS) क्या होता है तो मैं आपको सब चीज पूरी डिटेल में बता दिया हूं की डीआरएस क्या होता है फिर भी इसमें कुछ कमी रह गया हो तो प्लीज कमेंट करके जरूर बताएं की इसमें क्या कमी रह गया है और जितना हो सके इसको सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें। धन्यवाद

Manish Kumar
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